Why is 'height above sea level' written at a railway station? what does this mean?
रेलवे स्टेशन के किनारे "समुद्र तल से ऊंचाई" क्यों लिखी होती है? इसका जवाब जानने के लिए आपको थोडा सा इतिहास में झांकना होगा?
आपको याद होगा कि अज से ज़माने पहले रेलवे भाप वाले इंजिनों का प्रयोग करती थी. इनमें कोयले को जलाकर बायलर में भरे पानी को उबालकर भाप बनायीं जाती थी. बायलर के अन्दर भाप को काफी दबाव बनाकर रखा जाता था. दवाब की वजह से ही भाप इंजन में गति पैदा कर पाती थी.
अब बात करते हैं आपके प्रश्न के उत्तर की. उस भाप के इंजन के ड्राईवर को पानी भरना कोयला की मात्रा और बायलर में भरी भाप के दवाब पर कड़ी नजर रखनी पड़ती थी
अब साइंस को समझें - जैसे जैसे हम ऊंचाई पर जाते हैं वैसे वैसे वायु का दवाब कम होता जाता है. इस कम होते दवाब के कारण सुरक्षा हेतु बायलर के अन्दर का दवाब और वातावरण के दबाव के बीच एक संतुलन बनाये रखने की आवश्यकता होती है. ड्राईवर को अगर इस बात की जानकारी हो कि गाडी समुद्र तल से कितनी उंचाई पर चल रही है तो यह बायलर के अन्दर का दबाव और बाहरी वातावरण के दबाव में संतुलन आसान हो जाता है.
इसी कारण उस ज़माने में ये जानकारी स्टेशन पर लिख दी जाती थी. आज के समय समुद्र तल से ऊंचाई बताने वाले डिजिटल उपकरण Altimeter घडी से भी छोटे आकार में मिल जाते हैं. ये इंजिन में ही लगे होते हैं.
समय के साथ नए इंजिन आने लगे. अब डीजल और इलेक्ट्रिक इंजिन ही आते हैं. इन इन्जंस को ऊँचाई दबाव या किसी इस प्रकार की खास जरूरत नहीं होती है. पहाड़ों में बिछाई रेल पटरी हर किलोमीटर में उंचाई तय करती है. और यह ऊंचाई तय करने की मात्र रेल पटरी के किनारे लगे फलक पर लिखी रहती है. ड्राईवर इससे आसानी से ऊंचाई के बारे में जान पाते हैं.
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