भूगोल - कक्षा 11 | पृथ्वी की आतंरिक संरचना | Interior of the earth
Class 11th Geography Chapter 3 - पृथ्वी की आतंरिक संरचना
पृथ्वी की आतंरिक संरचना को समझना एक बहुत जटिल कार्य था. इस अध्याय में आप पृथ्वी की आतंरिक संरचना को समझने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष साधनों के बारे में पढेंगे. पृथ्वी की आतंरिक संरचना को समझने में भूकम्प ने एक अद्वितीय भूमिका निभाई है साथ ही साथ ज्वालामुखी तथा अन्य कई साधनों से पृथ्वी की आतंरिक संरचना को समझ पाना आसान हुआ है.
इस वीडियो में आप प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष साधन , भूकंप, भूकंप से निकली धरातलीय और भूगर्भिक तरंगे, भूकंप के प्रभाव, आदि के बारे में विस्तार से पढेंगे.
इस पार्ट के महत्वपूर्ण नोट्स
भूगर्भ की जानकारी के साधन
- प्रत्यक्ष साधन - चट्टान, खनन कार्य, ज्वालामुखी उदगार
- अप्रत्यक्ष साधन - [ तापमान, दवाब, घनत्व, ] उल्काएं, गुरुत्वाकर्षण बल, चुम्कीय क्षेत्र,
- भूकंप - तरंगे
भूकंप (Earthquake) - भूकंप का अर्थ है - पृथ्वी का कम्पन
प्राकृतिक भूकंप क्यों आता है?
- प्रायः भ्रंश के किनारे किनारे ऊर्जा निकलती हैं। भूपर्पटी की शैली में अंदर आ रही भ्रंश कहलाती हैं। भ्रंश के दोनों तरफ से ले विपरीत दिशा में गति करती हैं। जहां ऊपर के शैलखंड दबाव डालते हैं, उनके आसपास का घर्षण उन्हें परस्पर बांधे रखता है। फिर भी अलग होने की प्रवृत्ति के कारण एक समय पर घर्षण का प्रभाव कम हो जाता है । जिसके परिणाम स्वरूप शैल खंड विकृत होकर अचानक एक दूसरे के विपरीत दिशा में सड़क जाते हैं जिससे ऊर्जा निकलती है और ऊर्जा सभी तरंगों में और ऊर्जा सभी दिशाओं में गतिमान होती हैं
- उद्गम केंद्र (फोकस) - वह स्थान जहां से ऊर्जा निकलती है भूकंप का उद्गम केंद्र फोकस कहलाता है । इसे अब केंद्र भी कहा जाता है।
- अधिकेंद्र - ऊर्जा तरंगे अलग-अलग दिशा में चलती हुई पृथ्वी की सतह तक पहुंचती हैं। भूतल पर वह बिंदु जो उद्गम केंद्र के सबसे करीब होता है इसे अधिकेंद्र कहा जाता है।
- अधिकेंद्र पर ही सबसे पहले तरंगों को महसूस किया जाता है।
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