"भारत में कुछ मुस्लिम राजनैतिक संगठन 'सविनय अवज्ञा आंदोलन' के प्रति उदासीन थे।" इस कथन की परख कीजिए।
उत्तर : भारत में सविनय अवज्ञा आंदोलन 9 अप्रैल 1930 को महात्मा गाँधी द्वारा देशवासियों के समक्ष रखा गया। देश के कोने-कोने में इसकी सूचना पहुँच गयी तथा लोगों ने आंदोलन के अंतर्गत न केवल सहयोग करने वरन् औपनिवेशिक कानूनों का उल्लंघन शुरू कर दिया। विदेशी कपड़ों की होली जलायी, नमक कानून तोड़ा, किसानों ने लगान तथा चौकीदारी कर को चुकाने से मना कर दिया परंतु कुछ मुस्लिम राजनीतिक संगठनों ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग नहीं लिया। इसके निम्न कारण थे:
(i) अंग्रेजों द्वारा चलाई गई 'फूट डालो, शासन करो' की नीति ने मुस्लिम समुदाय को सदैव सशंकित रखा। वे मुख्य धारा से जुड़ नहीं पाए।(ii) मुस्लिम लीग ने प्रचार किया कि हिंदू तथा मुसलमान दो अलग-अलग कौमे हैं। इस प्रचार से मुस्लिम राजनीतिक 1. संगठन सविनय अवज्ञा आंदोलन में भाग न लेकर उसके प्रति उदासीन रहे।
(iii) मुसलमानों ने अंग्रेजी सरकार के सामने ऐसी-ऐसी माँगें रखीं जिसे पूरा करने में सरकार असमर्थ थी तथा जिनका हल केवल देश का विभाजन ही था।
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