19वीं शताब्दी के अंत तक भारत में लोगों को संगठित करने में आई विभिन्न समस्याओं का उल्लेख करें।
उत्तर : (i) दलित वर्गों की समस्याएँ : कांग्रेस ने लंबे समय तक दलितों पर ध्यान नहीं दिया क्योंकि कांग्रेस रूढ़िवादी सवर्ण हिंदू सनातनपंथियों से डरी हुई थी । डॉ. अम्बेडकर ने 1930 में दलितों को दलित वर्ग एसोसिएशन में संगठित किया। दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्रों के सवाल पर दूसरे गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गाँधी के साथ उनका काफी विवाद हुआ।
(ii) हिंदू-मुसलमानों के बीच बढ़ता फैसला : 1920 के दशक के मध्य से कांग्रेस, हिंदू महासभा जैसे हिंदू धार्मिक राष्ट्रवादी संगठनों के काफी करीब दिखने लगी थी। जैसे-जैसे हिंदू-मुसलमानों के बीच संबंध खराब होते गए, दोनों समुदाय उग्र धार्मिक जुलूस निकालने लगे । इससे कई शहरों में हिंदू-मुस्लिम साम्प्रदायिक टकराव व दंगे हुए। हर दंगे के साथ दोनों समुदायों के बीच फासला बढ़ता गया ।(iii) पृथक निर्वाचिका तथा दो राष्ट्र का सिद्धांत :मुस्लिम लीग के नेता मोहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचिका की माँग की। उनको भय था कि हिंदू बहुसंख्या के वर्चस्व की स्थिति में अल्पसंख्यकों की संस्कृति और पहचान खो जाएगी। अनेक प्रमुख मुस्लिम नेताओं जैसे मोहम्मद इकबाल ने पृथक निर्वाचिका की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने भी दो राष्ट्ों के सिद्धांत का प्रस्ताव रखा जिसके अन्तर्गत यह मान लिया गया कि दोनों समुदाय विभिन्न राष्ट्रों से संबंध रखते हैं।
COMMENTS