भाषाई आधार पर भारत में राज्यों का निर्माण (या गठन) कैसे किया गया था ? संक्षेप में इसकी चर्चा कीजिए ।
उत्तर : राज्यों का गठन-एक संक्षिप्त परिचय (Organization of the States-A brief Introduction) भारत के राज्यों और उनके तथाकथित राजकुमारों ने एक बार सम्मिलन के दस्तावेज (Instrument of Accession) : पर हस्ताक्षर करके भारत संघ में अपने राज्यों का विलीनीकरण स्वीकार कर लिया लेकिन दो सौ से भी अधिक वर्ष तक अंग्रेजों की संगति और इंग्लैंड के कॉलेजों में शिक्षा-दोनों ने उन्हें अंग्रेज़ नीति को पुनर्जीवन देने के लिए व्याकुल कर दिया और संविधान में किसी तरह की व्यवस्था न रहने के बाद भी 1952 में एक नए राज्य आंध्र प्रदेश का पुनर्गठन करा लिया। संविधान के लिखित स्वरूप का यहीं से अवमान या पैबन्द लगाना अथवा संशोधन करना आरंभ हुआ और हमारा देश 1956 (सातवाँ संशोधन अधिनियम) के 14 राज्यों और 6 संघ राज्य क्षेत्रों से खंडित होता हुआ आज 28 राज्य और 7 संघ क्षेत्रों (राजधानी क्षेत्र दिल्ली सहित) में टूट चुका है। वर्ष 2006 तक हमारे संविधान में 93 पैबंद या संशोधन लगाए/किए जा चुके हैं। 61 वर्ष में 93 संशोधन का तात्पर्य यह है कि प्रति वर्ष एकाधिक संशोधन किया जा रहा है। केवल भाषा ही नहीं बल्कि संस्कृति, भौगोलिक स्वरूप, दशाओं और जाति के आधार पर भी राज्यों के पुनर्गठन हो रहे हैं। आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश से पुन: नए राज्यों की माँग उठने लगी है। संभव है कि दो या चार वर्ष में चार नए राज्य और बन जाएँगे। खंडित होती जा रही आधुनिक लोकतांत्रिक राजनीति की यह मनोदशा और हम सभी नागरिक आज भी राष्ट्रीय पर्व, जलसे या जुलूस में अखंड भारत का राग अलापते नहीं अघाते।
COMMENTS