यूरोप में 'राष्ट्र' के विचार के निर्माण में संस्कृति ने किस प्रकार महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : राष्ट्रवाद का विकास केवल युद्धों तथा क्षेत्रीय विस्तार से ही नहीं हुआ। इसके विकास में संस्कृति ने भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। कला, काव्य, कहानी, किस्सों और संगीत ने राष्ट्रवादी भावनाओं को उभारने और व्यक्त करने में सहयोग दिया। इस संबंध में निम्नलिखित उदाहरण दिये जा सकते हैं :
(i) रूमानीवाद : रूमानीवाद एक सांस्कृतिक आंदोलन था जो एक विशेष प्रकार की राष्ट्रीय भावना का विकास करना चाहता था। रूमानी कलाकारों तथा कवियों ने तर्क-वितर्क और विज्ञान की देन के स्थान पर अंतर्दृष्टि और रहस्यवादी भावनाओं पर बल दिया। उनका प्रयास था कि एक सांझी-सामूहिक विरासत की अनुभूति और एक साझे सांस्कृतिक अतीत को राष्ट्र का आधार बनाया जाये। जर्मन दार्शनिक योहान गॉटफ्रॉड जैसे रूमानी चिंतकों ने दावा किया कि सच्ची जर्मन संस्कृति उसके आम लोगों में निहित है। उनका विश्वास था कि राष्ट्र की सच्ची आत्मा लोकगीतों, जन काव्य तथा लोक कथाओं से प्रकट होती है। इसलिए लोक संस्कृति के इन घटकों को एकत्र और अंकित करना राष्ट्र के निर्माण के लिए आवश्यक है।(ii) स्थानीय बोलियाँ तथा लोक साहित्य : राष्ट्रवाद के विकास के लिए स्थानीय बोलियों पर बल और स्थानीय लोक साहित्य को एकत्र किया गया। इसका उद्देश्य आधुनिक राष्ट्रीय संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना था जिनमें से अधिकांश निरक्षर थे। यह बात विशेष रूप से पोलैंड पर लागू होती है। इस देश का 18वीं शताब्दी के अंत में रूस, प्रशा और ऑस्ट्रेलिया जैसी बड़ी शक्तियों ने विभाजन कर दिया था। भले ही पोलैंड अब स्वतंत्र भूक्षेत्र नहीं था तो भी संगीत और भाषा के माध्यम से वहाँ राष्ट्रीय भावना को जीवित रखा गया। उदाहरण के लिए केरल कुपिस्की ने अपने ओपेरा और संगीत से राष्ट्रीय संघर्ष का गुणगान किया और पोलेलेस तथा माजुरका जैसे लोकनृत्यों को राष्ट्रीय प्रतीकों में बदल दिया।
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