केन्द्र तथा राज्य सरकारों के बीच विधायी शक्तियों के तीन स्तरीय विभाजन की व्याख्या कीजिए। जिन विषयों की चर्चा इन तीनों सूचियों में नहीं है, उन्हें हम क
उत्तर : संविधान में स्पष्ट रूप से केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विधायी अधिकारों को तीन हिस्सों में बाँटा गया है। ये तीन सूचियाँ इस प्रकार हैं
(1) संघ सूची में प्रतिरक्षा, विदेशी मामले इत्यादि राष्ट्रीय महत्त्व के विषय हैं। इन पर केवल केंद्र सरकार कानून बना सकती है।
(2) राज्य सूची में प्रांतीय और स्थानीय महत्त्व के विषय जैसे-पुलिस, व्यापार इत्यादि हैं। इन पर केवल राज्य सरकार ही कानून बना सकती है।
(3) समवर्ती सूची में शिक्षा, वन इत्यादि विषय हैं जो केंद्र के साथ राज्य सरकारों की साझी दिलचस्पी में आते है। दोनों इस पर कानून बना सकते हैं। लेकिन जब दोनों के कानून में टकराव हो तो केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया कानून मान्य होता है।
प्रश्न 6. भारत में सत्ता की भागीदारी कैसे की गई है?
उत्तर : भारत संघ वस्तुत: राज्यों को सम्मिलन दस्तावेज (Instrument of Accession) के द्वारा परस्पर जोड़ने वाली संघात्मक है। व्यवस्था सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से यह संभव हो पाया था। विविध प्रोत्साहन, अधिकार आदि देकर 562 रजवाड़ों को किसी तरह भारत संघ में मिलाया गया था। किसी राज्य (यथा-हैदराबाद) के लिए बल प्रयोग भी करना पड़ा। स्वेच्छा से भारत संघ में विलीन होने वाले राज्य यदा-कदा ही बने। राज्यों की तुलना में इसीलिए केन्द्र को अधिक शक्तिशाली बनाया गया है। जम्मू और कश्मीर जैसे राज्यों को विशेष प्रास्थिति या अधिकार प्राप्त है। इस राज्य का अपना अलग संविधान है। यह भारत सरकार अधिनियम 1935 और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का कमाल है जिसमें अंग्रेजों ने रजवाड़ों को स्वैच्छिक शक्तियाँ दे दी थीं।
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