भारत की भाषाई विविधता की चर्चा कीजिए।
उत्तर-भारत की भाषाई विविधता
(i) भारत एक बहु भाषाई देश है। 1991 की जनगणना के अनुसार भारत में कुल 1500 भाषाएँ बोली जाती हैं। भोजपुरी, मगही, बुंदेलखंडी, छत्तीसगढ़ी, राजस्थानी और भीली भाषाओं को हिन्दी के अंदर जोड़ लिया गया है। ऐसी समूहबद्धता के बाद भी यहाँ 114 प्रमुख भाषाएँ हैं।(ii) वर्ष 2003 से चार भाषाएँ भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में और जोड़ दी गई हैं और इस तरह अनुसूचित भाषाओं की संख्या 22 हो गई है।
(iii) सबसे बड़ी भाषा हिन्दी अब सिर्फ 40.2 फीसदी लोगों की मातृभाषा रह गई है। अगर हिन्दी जानने वालों की संख्या त्रिभाषा सूत्र के आधार पर जोड़ी जाए तो भी 1991 में यह संख्या 50 प्रतिशत से कम ही थी।
(iv) जहाँ तक अंग्रेज़ी की बात है सिर्फ 0.20 फीसदी लोगों ने इसे अपनी मातृभाषा बताया था। दूसरी या तीसरी भाषा के तौर पर 11 फीसदी लोग इसे जानते थे।
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