क्रान्तिकारी आन्दोलन में महिलाओं की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर : बंगाल की अनेक वीर औरतों ने क्रान्तिकारी सूर्यसेन का साथ दिया। उन्होंने सेन के सुर में सुर मिलाकर घोषित किया कि 'गाँधी जी का राज आ गया है।' (Gandhiji's Raj has come) इन वीरांगनाओं में प्रीतिलता वाडेकर एवं कल्पना दत्त सर्वाधिक प्रसिद्ध थीं। 22 सितम्बर, 1932 को प्रीतिलता वाडेकर के नेतृत्व में औरतों ने चिटगाँव (Chittagong) स्थित यूरोपीय क्लब पर बर्मों तथा पिस्तौलों के साथ आक्रमण कर दिया। इस आक्रमण के दौरान उन्हें बाहरी चोटें लगीं। शीघ्र ही उन्होंने आत्महत्या (प्रीतिलता वाडेकर ने) कर ली ताकि निर्दयी पुलिस के द्वारा कैद न कर ली जायें।
स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियाँ जैसे कि सुनीति चौधरी एवं शान्ति घोष भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने त्रिपुरा के मजिस्ट्रेट स्टीवेन्स को गोली मार कर मृत्यु की नींद सुला दिया। एक अन्य बहादुर लड़की बीनादास (Bina Das) ने 1932 में बंगाल के गवर्नर स्टानली जैक्सन पर आक्रमण किया। इन वीरांगनाओं की क्रान्तिकारी गतिविधियों एवं बलिदान से पूर्ण कार्यवाहियों ने अनेक भारतीयों को त्याग करने के लिए प्रेरित किया।
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