देहात में असहयोग आंदोलन के फैलने का वर्णन कीजिए।
उत्तर : असहयोग आंदोलन का आरंभ राष्ट्रीय आंदोलन में शहरी मध्यमवर्ग के शामिल होने से हुआ लेकिन यह धीरे-धीरे अवध के किसानों तक फैल गया। इसका नेतृत्व बाबा रामचंद कर रहे थे। उनका आंदोलन ताल्लुकदारों और जमींदारों के विरुद्ध था जो देहात में किसानों से भारी-भरकम लगान और अनेक प्रकार के कर वसूलते थे। किसानों को बेगार भी करनी पड़ती थी। पट्टेदार के रूप में किसानों के पट्टे निश्चित नहीं होते थे। वे अपनी इन्हीं समस्याओं को लेकर असहयोग आंदोलन में शामिल हुए। उनकी मुख्य माँग थी कि लगान कम किया जाए, बेगार समाप्त हो और जमींदारों का सामाजिक बहिष्कार किया जाए। यह आंदोलन देहातों में आग की तरह फैलने लगा। अंत में स्थानीय नेताओं ने यह कहा कि महात्मा गाँधी जी ने घोषणा कर दी कि अब कोई लगान नहीं भरेगा और जमीन गरीबों में बाँट दी जाएगी।
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