असहयोग आंदोलन के प्रभाव का वर्णन कीजिए।
उत्तर : असहयोग आंदोलन का प्रभाव (Impact of the Non-Cooperation Movement) : 1920 के असहयोग आंदोलन को अपार सफलता मिली। विधानमंडलों के चुनावों में लगभग दो- तिहाई मतदाताओं ने मतदान नहीं किया। शिक्षा-संस्थाएँ खाली हो गई। राष्ट्रीय शिक्षा का नया कार्यक्रम आरंभ किया गया। जामिया मिलिया और काशी विद्यापीठ जैसी संस्थाएँ इसी दौर में स्थापित हुई। अनेक भारतीयों ने सरकारी नौकरियाँ छोड़ दीं। विदेशी कपड़ों की होलियाँ जलाई गई। पूरे देश में हड़तालें हुई। मालाबर में मोपला विद्रोह छिड़ गया। हिंदू और मुसलमान एक होकर इस आंदोलन में शामिल हुए और पूरे देश में भाई-चारे के उदाहरण देखे गए। सिखों ने गुरुद्वारों से सरकार-समर्थक और भ्रष्ट महंतों का कब्जा खत्म कराने के लिए आंदोलन छेड़ा। हजारों लोगों ने स्वयंसेवकों में नाम लिखाया। आंदोलन के दौरान प्रिंस ऑफ वेल्स भारत आए। जब वह 17 नवंबर, 1921 को भारत पहुँचे तो उनका "स्वागत" आम हड़तालों और प्रदर्शनों द्वारा किया गया। अनेक जगहों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई। दमन जारी रहा और साल के खत्म होने तक गाँधीजी को छोड़कर सभी बड़े नेता जेल में बंद किए जा चुके थे। 1922 के आरंभ में लगभग 30,000, लोग सीखचों के पीछे थे।
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