19वीं सदी के अंतिम वर्षों में यूरोप में राष्ट्रवाद के स्वभाव में आए परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर : (i) यह क्षेत्र भू-आकारिकी और मानव-जातियों की दृष्टि से अति-विभिन्नता और विविधता वाला था। यहाँ के | लोग राजनीतिक अधिकारों के लिए इसको राष्ट्र-राज्य बनाने के इच्छुक थे।
(ii) विभाजन प्राइमरी पाठशाला में प्रवेश से आरंभ हुआ था।
इस क्षेत्र के निवासी 'स्लाव' कहलाते थे। इस समय के रोमानिया, बुल्गारिया, अल्बानिया, ग्रीस (यूनान), मैसिडोनिया, क्रोएशिया, बोस्निया, हरजेगोविना, स्लोवेनिया एवं मान्टेनीग्रो राष्ट्र उस समय संयुक्त नाम 'बाल्कान क्षेत्र' में समाए हुए थे। मनुष्य के निजवाद (Individualism) की राजनीति में यह पहली छलाँग थी। (iii) जातीय विविधता क्रमशः विभेद को जन्म देती है क्योंकि इस विविधता को राजनीतिक रंग देते ही समाज-संगठन के संविधान में परिवर्तन आने लगते हैं अर्थात् राज-व्यवस्था तदनुसार परिवर्तित होती जाती है। व्यष्टि में जन्म लेने वाली 'मुक्त मानसिकता ही उसको राजनीति के दुश्चक्र में फँसाकर राज्य स्तर पर साम्राज्यवादी शक्तियों और अति पूंजीवाद को जन्म देती है।
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