"सविनय अवज्ञा आंदोलन' असहयोग आंदोलन से भिन्न था।" कथन की पुष्टि उदाहरणों सहित कीजिए।
उत्तर : सविनय अवज्ञा आन्दोलन के दौरान चारों ओर हड़तालों, विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार और प्रदर्शनों की गूँज से आसमान फटने लगा। सरकार द्वारा लगाए गए विभिन्न करों का विरोध किया गया। यहाँ तक कि किसानों ने भू-राजस्व और लगान देने से इन्कार कर दिया। इस आन्दोलन में महिलाएं भी पुरुषों से पीछे न रही। उन्होंने विदेशी कपड़ों की दुकानों पर धरने दिए तथा वे भी सहर्ष जेल गईं।
दूसरी तरफ, असहयोग आन्दोलन के दौरान लोगों ने सरकार द्वारा दी गई पदवियाँ लौटा दीं। गाँधीजी का विचार था कि लोगों को सरकारी नौकरियों, सेना, पुलिस अदालतों, विद्यार्थी परिषदों, स्कूलों और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करना चाहिए। यदि सरकार दमन का रास्ता अपनाती है, तो व्यापक सविनय अवज्ञा अभियान शुरू किया जाना चाहिए।
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