"साथ रहकर संघीय व्यवस्था अपनी संघटक इकाइयों को समान अधिकार नहीं देती।" भारत के संदर्भ में इस कथन की उदाहरणों की मदद से व्याख्या कीजिए ।
उत्तर : यह कथन सही है कि साथ रहकर संघीय व्यवस्था अपनी संघटक इकाइयों को समान अधिकार नहीं देती। प्रायः संघीय व्यवस्थाओं में राज्यों की तुलना में केंद्र सरकार अधिक शक्तिशाली होती है। अक्सर इस व्यवस्था में विभिन्न राज्यों को समान अधिकार दिए जाते हैं पर विशेष स्थिति में किसी-किसी प्रान्त को विशेष अधिकार भी दिए जाते हैं जैसाकि भारत में केंद्र और राज्यों के मध्य शक्तियों के विभाजन से प्रमाणित होता है। भारत में शक्तियों का विभाजन निम्न प्रकार से है
(i) दो स्तरीय शासन व्यवस्था : भारत में दो स्तरीय शासन व्यवस्था, केंद्रीय सरकार और राज्य सरकार, की स्थापना की गई। संविधान के अनुसार केंद्रीय सरकार सारे देश का प्रतिनिधित्व करती है। 1992 में तीसरे स्तर अर्थात् पंचायती राज की स्थापना की गई।(ii) शक्तियों का विभाजन : केंद्र और राज्यों में विधायी अधिकारों का विभाजन तीन सूचियों के द्वारा किया गया है । ये सूचियाँ हैं-संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची। अवशिष्ट विषय, जो किसी भी सूची में शामिल नहीं हैं, केंद्रीय सरकार को प्रदान किए गए हैं।
(ii) कुछ राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त होना : बड़ी संघीय इकाइयों में सभी राज्यों या इकाइयों को समान दर्जा नहीं मिलता है। भारत में कुछ राज्यों को जैसे-जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा दिया गया है। जम्मू-कश्मीर का अपना संविधान है और भारतीय संविधान के कई प्रावधान यहाँ पर लागू नहीं होते हैं। कई इकाइयों जैसे-केंद्र शासित प्रदेश- दिल्ली को कम अधिकार प्राप्त हैं।
(iv)संविधान में संशोधन या केंद्र व राज्यों में सत्ता के बँटवारे में परिवर्तन करना कठिन : संविधान के बुनियादी ढाँचे में परिवर्तन या संशोधन के लिए संसद के दो- तिहाई बहुमत की स्वीकृति के साथ आधे राज्यों की विधानसभाओं की स्वीकृति भी आवश्यक है। संसद अकेले इसमें परिवर्तन नहीं कर सकती।
(v) स्वतंत्र न्यायपालिका की भूमिका : सर्वोच्च न्यायालय के रूप में न्यायपालिका संविधान के प्रावधानों और कानूनों को लागू करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है न्यायपालिका संविधान की रक्षक है और केंद्र व राज्यों में विवादों का निर्णय करती है। संविधान के विरुद्ध कानूनों को अवैध घोषित करती है।
(vi) पंचायतें ग्राम सभा की देखरेख में काम करती हैं। गाँव के सभी मतदाता ग्राम सभा के सदस्य होते हैं। ग्राम सभा, ग्राम पंचायत का बजट पास करती है और ग्राम पंचायत के कार्य का समीक्षा करती है। साल में कम-से-कम दो या तीन बार इसका बैठक होती है।
COMMENTS