कोविड-19 से बचाव के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मास्क N95 कोरोनावायरस को रोकने में मददगार नहीं है। N95 मास्क कोरोना को रोकने में मददगार नहीं है
स्वास्थ मंत्रालय ने N95 मास्क को क्यों बैन किया ?
जैसा कि हम यह जानते हैं कि पूरे विश्व में कोरोना महामारी फैल चुकी है और पूरा विश्व कारोना कि वैक्सीन ढूंढने में लगा पड़ा है ऐसे हमारे पास एक ही विकल्प बचता है कि हम इस महामारी से अपने आप को सिर्फ सावधानी बरतकर बचा सकते हैं।ऐसे में हम से कहा गया है कि हम लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखें वा समय-समय पर हाथ को धोते रहें और मास्क का इस्तेमाल करें।
कोरोना वायरस दुनिया में एक ऐसा वायरस बनता जा रहा है जिसके बारे में अभी तक किसी को कोई पूरी सटीक जानकारी नहीं मिली है। आये दिन हमें कुछ ना कुछ नई खबर इससे संबंधित मिलती रहती है। दिसंबर 2019 से लेकर जुलाई तक स्वास्थ्य एजेंसियों ने कहा था कि हम किसी भी प्रकार के मास्क का इस्तेमाल करते हैं तो हम कोविड-19 से होने खतरे को रोक सकते हैं और इस संक्रमण को फैलने से रोक सकते हैं ।
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ऐसे में कुछ दिन पहले ही खबर आई कोविड-19 से बचाव के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मास्क N95 कोरोनावायरस को रोकने में मददगार नहीं है। N95 मास्क कोरोना को रोकने में मददगार नहीं है यह जानने से पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि N95 मास्क कैसे होते हैं?
क्या है N95 मास्क ?
N95 मास्क
एक प्रकार का मास्क है जो व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो कि पहनने वाले को वायु से आने वाले कणों और चेहरे को दूषित करने तत्वों जोकि हवा में मौजूद होते हैं उन से बचाता है।
N95 मास्क सामान्य जनता द्वारा और सभी स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है जिससे हवा के माध्यम से फैलने वाली कुछ संक्रमण और प्रदूषित करने वाले कणों से से खुद को बचा सकें.
N95 MASK में लगा हुआ फिल्टर व्यक्ति द्वारा ली गई सांस को फिल्टर करता है तथा हवा में पाए जाने वाले सभी प्रकार के वायरस को मास्क के अंदर प्रवेश करने से रोकता है इस मास्क की एक खास बात है कि यह सामान्यता इस्तेमाल किए जाने वाले मास्क की तुलना में मास्क के अंदर गर्मी और कार्बन डाइऑक्साइड को बढ़ने से रोकता है तथा इसमें लगा हुआ फिल्टर हमें सांस लेने की सुविधा प्रदान करता है

N95 मास्क 300 नैनोमीटर (एक नैनोमीटर मीटर का एक अरब वां हिस्सा है) से छोटे 95% कणों को फिल्टर करता है जबकि हमें पता है कि SARS-CoV-2 आकार 65 से 125 नैनोमीटर के बीच होता है अतः यह SARS-CoV-2 मास्क कोरोना वायरस को फिल्टर करने में काफी हद तक कामयाब होता है
N95 मास्क को स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्यों बैन किया?
तो हम आपको बता दें इस मास्क के अंदर लगा हुआ फिल्टर सिर्फ वन वे फिल्टर है मतलब यह व्यक्ति के द्वारा ली गई सांस को तो शुद्ध करता है लेकिन व्यक्ति द्वारा निकाली गई सांस को फिल्टर नहीं करता इसका मतलब यह होता है कि अगर कोई भी व्यक्ति इस मास्क को लगाता है तो यह मास्क कोरोना के वायरस को अंदर नहीं प्रवेश करने देगा, लेकिन जब भी वह सांस लेगा तो उसके आसपास लोगों को संक्रमण फैलने का खतरा बना रहेगा।
कई जगह पर ऐसा दिखा गया कि कई लोग कोरोना से संक्रमित तो थे लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार का कोई लक्षण नहीं था जैसे बुखार जुखाम सर्दी सिर दर्द इत्यादि उन्हें ऐसा कोई लक्षण नहीं पाया गया।
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अब यदि इस प्रकार का कोई भी व्यक्ति जोकि N95 मास्क को इस्तेमाल करते हुए समाज में बैठा होगा तो वह अपने आसपास के लोगों को सांस छोड़ते वक्त जरूर संक्रमित कर देगा क्योंकि यह मास्क व्यक्ति द्वारा छोड़ी गई सास को फिल्टर नहीं करता।
N95 मास्क को यदि कोई व्यक्ति लगाता है और वह अनजाने में किसी अन्य व्यक्ति को SARS-CoV-2 वायरस अनजाने में दे देगा यही एक मुख्य कारण है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने N95 मास्क को बैन किया और उसकी जगह तीन परतों वाले कपड़े से बने हुए किसी भी प्रकार के मास्क को इस्तेमाल करने की सलाह दी।
यदि अभी भी आप N95 मास्क का उपयोग करते हैं तो इसमें आपने अपनी सेफ्टी का पूरा ख्याल रखा हुआ है परंतु आपसे अनुरोध है कि आप देश के अन्य लोगों का भी सेफ्टी का पूरा ध्यान रखें और इस जिम्मेदारी को समझते हुए N95 मास्क जिसमें वाल्व लगा होता है उसका प्रयोग ना करें।
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