In this post you will know that why does everyone have a unique voice. Sabhi logon ki awaj ek jaisee kyon nahi hoti.
क्या आपने कभी सोचा है कि यदि कोई आपका दोस्त है आपके घरवाले आपको आवाज देते हैं तो आप कैसे पहचान लेते हैं कि कौन आवाज दे रहे हैं अपने पसंदीदा गायक को भी तुरंत पहचान लेते हैं लेकिन अगर सभी की आवाज एक जैसी होती तो हमारा जीवन कैसा होता ?
एक बार आप सोच कर देखिए कि यदि सब की आवाज एक जैसी होती आप कैसे पता कर पाते कि आपको कौन आवाज दे रहे हैं या आपका नाम कौन ले रहा है ? तो आप इस पर विचार करके देखिए कि हम कितना कंफ्यूज रहते कि कौन हमें कहां से पुकार रहा है, क्योंकि हर तरफ से एक जैसी ही आवाज आती, लेकिन खुशी की बात यह है कि ऐसा नहीं है।

सभी लोगों की आवाज अलग क्यों होती है ?
सौभाग्य से हम सब की आवाज एक जैसी नहीं होती हैं ? यहां तक लोग एक शक्ल के दिखाई दे सकते हैं लेकिन फिर भी आवाज में थोड़ा बहुत अंतर जरूर होता है परंतु क्यों ? दोस्तों आज हम इसी विषय पर बात करेंगे।
क्या आपको पता है कि आपकी आवाज उतनी ही अद्वितीय होती है जितना कि आप के उंगलियों के निशान। हालांकि कुछ लोगों की आवाज एक जैसी लग सकती हैं लेकिन पूरी तरह नहीं होती।
मानव शरीर बहुत ही अनोखा होते हैं । आइए जानते हैं मानव शरीर आवाज को कैसे निकालता है और यह सभी अन्य जनों से कैसे अलग होती हैं? अब आप यह भी समझ जायेंगे कि सभी की आवाज अलग क्यों होती है।

Why Does Everyone Have a Unique Voice?
मानव शरीर में आवाज निकालने के लिए शुरुआत होती है फेफड़ों से जहां से हवा बाहर की तरफ निकाली जाती है हवा फेफड़ों से निकलकर वॉइस बॉक्स के जरिए आगे बढ़ती हैं , वॉइस बॉक्स जिसे स्वर यंत्र भी कहा जा सकता है, के ऊपर कुछ सिलवटें होती हैं जिन्हें डोरियों के रूप में भी जाना जाता है, से हवा जैसे ही गुजरती है, वोकल कॉर्ड जिन्हें स्वर रज्जू भी कहा जाता है तेजी से कंपन करने लगते हैं।
कंपन जितनी ज्यादा तेज होती है कामा पिच भी उतनी अधिक बनती हैं। आपकी आवाज की पिच काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी वोकल कॉर्ड की डोरियों की लंबाई कितनी है और उसमें तनाव कितना है, यही निर्धारित करता है कि आपकी आवाज कितनी मोटी या पतली होती हैं।
वोकल कॉर्ड और बाहरी वातावरण के बीच शरीर के कुछ हिस्से जैसे कि गला नाक और मुंह उस गूंजने वाले चेंबर के रूप में कार्य करते हैं जो आपकी आवाज को मानवी आवाज में बदल देते हैं। जैसा कि आप देख सकते हैं आवाज को उत्पन्न करने के लिए शरीर के कई अलग-अलग अंग प्रयोग में लिए जाते हैं। उन अंगों में से प्रत्येक अंग की बनावट भी अद्वितीय होती है। जिससे प्रत्येक व्यक्ति की आवाज अलग होते हैं।
समय के साथ आवाज क्यों बदल जाती है
इसके अलावा समय के साथ साथ आवाज बदलती जाती है इसका एक बड़ा कारण शरीर की बनावट में बदलाव और वोकल कॉर्ड की बनावट मैं लगातार परिवर्तन भी होता है।

जैसे जैसे लड़के बड़े होते हैं उनकी आवाज और गहरी होती जाती हैं ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लड़कों में टेस्टोस्टेरोन उनके वोकल कॉर्ड को लंबा और मोटा बनाते हैं। जैसे जैसे वह बड़े होते जाते हैं लड़कियों की आवाज भी बदलती जाते हैं लेकिन लड़कों की आवाज अधिक बदलती है जबकि लड़कियों की आवाज में परिवर्तन बहुत कम होता है।
अगर बात कीजिए पुरुषों की तो महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों की आवाज अधिक भारी होती है क्योंकि पुरुषों के वोकल कॉर्ड बड़े होते हैं और कम आवृत्ति ऊपर कंपन करते हैं।
आपने नोटिस किया होगा कि ठंड लगने पर आप की आवाज में बदलाव हो जाता है, जुखाम से ग्रस्त लोगों के लिए भी आमतौर पर आवाज बदल जाते हैं जिसका कारण है कि वायरस वह कल कार्ड में सूजन पैदा कर देते हैं। खांसी के कारण वोकल कॉर्ड की दूरियों में जलन और सूजन भी हो जाती है।
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कई बार मनुष्य की भावनाएं भी आवाज को बदलने में अहम भूमिका निभाती हैं। जब आप उत्तेजित हो जाते हैं या घबराते हैं या डरते हैं तो आपकी वोकल कॉर्ड के आसपास की मांसपेशियां कभी-कभी कल जाती हैं या ढीली पड़ जाती हैं जिसके कारण हम आवाज में बदलाव महसूस कर सकते हैं।
इसी तरह अलग-अलग परिस्थितियों में आवाज बदलती रहती हैं विशेषकर जब आप के मुख्य डोरियों में स्वर यंत्र पर या शरीर के किसी अन्य भाग में कोई परिवर्तन हुआ हो। कई बार प्रदूषण जल वायु अधिक धूम्रपान या बहुत अधिक चिल्लाना या बहुत अधिक चीखना इत्यादि से भी आवाज बदल जाती है।
आशा करता हूं आपको या जानकारी अच्छी लगी होगी। आप अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में लिखना ना भूलें और यदि आप पोस्ट आपको पसंद आता है तो इसे शेयर करना भी बिल्कुल ना भूलें
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